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मोदी-शाह नेपथ्य की ओर, योगी-हिमंता युग का आरम्भ

भारतीय जनता पार्टी में पिछले ४५ दिनों में घटनाक्रम तेजी से बदला है। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने प्रधानमंत्री कार्यालय में तैनात बाबू अरविंद कुमार शर्मा को सेवानिवृत्त होने के उपरांत उत्तर प्रदेश सरकार में समायोजित कराना चाहा किंतु उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सामने उनकी एक न चली। भाजपा के उत्तर प्रदेश इकाई के अध्यक्ष श्री स्वतंत्र देव सिंह ने अरविंद कुमार शर्मा को संगठन में भेज दिया। अरविंद कुमार शर्मा की हालत ये है वो एक ट्वीट या कू भी नहीं कर पाते हैं।

योगी आदित्यनाथ ने स्वयं के संगठन हिंदू युवा वाहिनी को पुनः सक्रिय किया है। हिंदू युवा वाहिनी नेपाल और उत्तर प्रदेश में अत्यधिक सक्रिय है। कोरोना महामारी के दौरान इनके संगठन को स्वास्थ्यकर्मियों के साथ तैनात किया गया है। भाजपा और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के विपरीत हिंदू युवा वाहिनी जिहादियों और मिशनरियों के विरुद्ध जमीन पर कार्य करने में विश्वास रखता है।

असम के नए मुख्यमंत्री हिमंत बिश्व शर्मा ने शपथग्रहण के ४५ दिनों के अंदर हिंदू हितों के कई निर्णय लिए हैं जिसमें बांग्लादेशी घुसपैठिए को असम से बाहर निकालना, NRC लागू करना, २ बच्चों के माता-पिता को ही सरकारी सुविधाओं का लाभ इत्यादि प्रमुख हैं।

अब गृह मंत्री अमित शाह की अकर्मण्यता पर चर्चा करते हैं। शाहीन बाग में ४५ दिनों तक सड़कें जाम करके अराजकता की कीमत दिल्ली में हिन्दू विरोधी दंगे में ५४ हिन्दुओं की हत्या से हुई। अमित शाह को इससे कुछ भी हासिल नहीं हुआ। वो दिल्ली विधानसभा बुरी तरह हार गए। आन्दोलनजीवियों के अराजकता में हत्या , बलात्कार में भी अमित शाह को कुछ हासिल नहीं हुआ। वो पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में बुरी तरह हार गए।

हिंदू मतदाताओं ने जिस लक्ष्य के साथ केंद्र में भाजपा को सत्ता सौंपी थी, भाजपा उस पर आगे नहीं बढ़ पा रही है। कांग्रेस ने बिना संसद के स्वीकृति के जामिया विश्वविद्यालय को मुस्लिम विश्वविद्यालय घोषित कर दिया था। भाजपा सरकार पिछले ७ वर्षों में अब तक ये दर्जा समाप्त नहीं कर पाई है जिससे इसमें हिंदू बच्चों को आरक्षण और प्रवेश मिले। २००९ ने सोनिया गाँधी ने जिस तरह से अल्पसंख्यकों को शिक्षा के क्षेत्र में कर में छूट दिया था, उससे हिंदुओं का शिक्षा व्यवसाय में टिके रहना मुश्किल हो गया है। भाजपा सरकार इस पर भी कुछ नहीं कर पाई है। समान नागरिक संहिता, मंदिरों को सरकारी नियंत्रण से मुक्त करना, काशी में विश्वनाथ मंदिर और मथुरा में श्रीकृष्ण जन्मभूमि को उसका गौरव वापस दिलाना ज्वलंत मुद्दे हैं।

हिंदू मतदाता मोदी-शाह से निराश योगी-हिमंता में अपना भविष्य देख रहा है।