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भारत सरकार का दोहरा रवैया; टिकटोक पर गरमी, ट्विटर पर नरमी

पिछले वर्ष २०२० में लदाख के गलवान घाटी में भारत-चीन के मध्य जब युद्द हुआ तो भारत के २२ सैनिक मारे गए और चीन के ४५ सैनिक मारे गए। इस युद्ध के तुरंत बाद भारत ने २९ जून, २०२० को टिकटोक पर प्रतिबंध लगा दिया।

प्रतिबंध से पूर्व भारत टिकटोक का विशालतम बाजार था। भारत में इसके ६० करोड़ डाउनलोडस, २० करोड़ सक्रिय यूजर्स, २ लाख सामग्री निर्माता थे।

टिकटोक की पैतृक कम्पनी ByteDance का एक और उत्पाद Helo भारतीय भाषाओं का विशालतम ऐप था। इसके ५ करोड़ सक्रिय यूजर्स थे। इस पर भारत सरकार के सत्यापित खाते थे जिस पर भारत सरकार अक्सर सजीव प्रसारण करती थी।

भारत में मार्च, २०२० में कोरोना को महामारी घोषित होने के बाद बाइटडान्स ने प्रधानमंत्री केयर कोष में ₹१० करोड़ का दान दिया। भारत में वर्ष २०२० के अंत तक इसके १०००० कर्मचारी थे। वर्तमान में इसके १,८०० कर्मचारी हैं।

भारत सरकार ने इन दोनों ऐप पर प्रतिबंध से पूर्व शर्त रखी कि बाइटडान्स भारत में डेटा सेंटर की स्थापना करे और भारत का डेटा यहीं पर जमा करे। वास्तविकता ये है बाइटडान्स ने पहले ही घोषणा कर रखी थी वो अगले २ वर्षों में भारत में डेटा सेंटर की स्थापना में २ बिलियन डॉलर का निवेश करेगा।

अब अमेरिका की वामपंथी मीडिया ट्विटर की चर्चा करते हैं। भारत में ट्विटर के मात्र १.७५ करोड़ सक्रिय यूजर्स हैं। ये वामपंथी और जिहादी गिरोह का राजनीतिक टूलकिट है। सोशल मंच का आवरण ओढ़े ये प्रत्येक देश के अंदरूनी राजनीति में हस्तक्षेप करता है। भारत में इसने आज तक प्रधानमंत्री राहत कोष में दान नहीं दिया है। इसके भारत में मात्र २५० कर्मचारी हैं। ये भारत के यूजर्स का डेटा अमेरिका में संग्रहित करता है।

ट्विटर ने भारत के उपराष्ट्रपति वेंकैय्या नायडू, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरचालक डॉ मोहन भागवत का खाता असत्यापित कर दिया। कल भारत के सूचना और प्रौद्योगिकी मंत्री रविशंकर प्रसाद का खाता अमेरिका के कॉपीराइट कानून का हवाला देते हुए बाधित कर दिया।

प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री श्री अमित शाह सदा आत्मनिर्भर भारत का नारा देते हैं जबकि ये दोनों स्वयं भारत के स्वदेशी ऐप कू पर अपना खाता नहीं बनाए हैं। ऐसे में भारत का सामान्य नागरिक आत्मनिर्भर भारत के प्रति कितना उत्साहित होगा?

नाइजीरिया सरकार ने क्षण भर में ट्विटर पर प्रतिबंध लगाकर कू पर अपना खाता बना लिया। आज कू का नाइजीरिया में बड़ा दल है जिसमें कई स्थानीय प्रशिक्षित नागरिकों को भी रोजगार मिला है।

आज भारत के सामान्य जनों के मन में प्रश्न उठ रहा है क्यों भारत सरकार ट्विटर पर प्रतिबंध नहीं लगा रही है? क्या ये किसी अमेरिकी दवाब का परिणाम है?